आजकल टीम अन्ना के महत्वपूर्ण सदस्य श्री अरविन्द केजरीवाल का यह बयान मीडिया पर आ रहा है कि लोकपाल के बाद उनकी टीम का अगला आन्दोलन राईट टु रिकाल एवं राईट टु रिजेक्ट (चुनावो के समय कोई उम्मीदवार पसंद नहीं आने पर सभी उम्मीदवारों को रिजेक्ट करने का अधिकार ) के लिए होगा , " अभी भी चुनाव आचार संहिता १९६१ के तहत व्यवस्था दी हुई है कि यदि आपको वोटिंग मशीन में दिए प्रतिनिधियों में से कोई भी पसंद नहीं है तो आप पोलिंग बूथ पर मौजूद चुनाव अधिकारी से फॉर्म -४९ ओ मांग सकते है ,जिस पर आप अपने हस्ताक्षर या अंगूठा लगा कर सभी उम्मीदवारों के लिए अपनी अरुचि जाहिर कर सकते है , अब इस इस्थ्ती में मेरे एक बात समझ नहीं आई कि राजनेतिक दलों के द्वारा तो ये बात जनता को इसलिए नहीं बताई कि जनता के ये बात जानने से उनके उम्मीदवारों को जनता द्वारा रिजेक्ट करने का खतरा है,परन्तु जब यह प्रावधान पहले से कानून में मौजूद है तो श्री अरविन्द केजरीवाल द्वारा इस मुद्दे पर आन्दोलन खड़ा करने कि बात क्यों कि जा रही है?
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