भारत में केंद्रीय स्तर पर 'राइट टू रिकॉल' लागू करने की बात जोर-शोर से उठ रही है ,जिसमे मतदाता को यहाँ अधिकार होगा कि सही काम ना करने पर वह अपने चुने हुए जनप्रतिनिधि को वापस बुला सकता है.क्यों ना कानून बनाने की मांग में हम जो समय जाया करते है वो ही टाइम हम मतदाता को राजनेतिक रूप से शिक्षित एवं जाग्रत करने में लगाये . आप किसी भी विषय को ले लीजिये , कानून की कमी नहीं है इस देश में , कमी है तो बस उसे लागु करने की इच्छा शक्ति दिखने की , यदि हमारे देश के मतदाता राजनेतिक रूप से इतने परिपक्व हो गए तो वो पार्टी, जाती एवं धन के आधार पर ख़राब जनप्रतिनिधि चुनेंगे ही नहीं एवं उन्हें व निर्वाचित प्रतिनिधि को भी इस बात का आभास होगा कि चुना गया आदमी सिर्फ जनता का सेवक है ,उसे वो ही काम करना है जो जनता चाहती है , यदि जनता का कहा नहीं किया तो यह मालिक जनता कान पकड़ कर नौकरी से गेट आउट भी कर सकती है.मेरा एसा मानना है कि अगर जनता मतदाता राजनेतिक रूप से शिक्षित एवं जाग्रत नहीं है तो रिकाल करके वापस बुलाने पर भी सिर्फ अगले चुनाव का ही खर्चा है जिसका भर भी हमारे ही ऊपर टैक्स के रूप में पड़ने वाला है क्यूंकि जाग्रति के अभाव में अगली बार कोई दूसरा ख़राब नेता चुनाव जीत जायेगा एसा करके कितनी बार चुनाव करवाएंगे हम
No comments:
Post a Comment